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‘मंत्री की सिफारिश के आधार पर…’, खुलासा करने वाले अस्पताल के डीन को भेजा जबरन छुट्टी पर, जाने क्या बोले मंत्री?

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Pune Porsche Accident: पुणे पोर्शे एक्सीडेंट मामले में डॉक्टर तावड़े और पुणे अस्पताल के एक अन्य डॉक्टर पर आरोपी नाबालिग के ब्लड सैंपल में हेरफेर कर तथ्यों को छुपाने के प्रयास करने का आरोप है.

पुणे पोर्शे हादसे मामले में एक और नया मोड़ तब आया जब ससून जनरल अस्पताल के डीन डॉक्टर विनायक काले को बुधवार को जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया. ये कदम तब उठाया गया, जब डॉक्टर विनायक काले ने खुलासा किया कि उन्होंने महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ की सिफारिश के आधार पर डॉक्टर अजय तावड़े को मेडिकल सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया था.

इस महीने की शुरुआत में पुणे में एक नाबालिग ने अपनी तेज रफ्तार पोर्शे कार से दो तकनीशियनों (एक महिला-एक पुरुष) को कुचल दिया था. दोनों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया था. आरोप लगाया गया कि हादसे के वक्त कार चला रहा नाबालिग नशे में था. डॉक्टर तावड़े और पुणे अस्पताल के एक अन्य डॉक्टर पर नाबालिग के ब्लड सैंपल में हेरफेर कर तथ्यों को छिपाने का आरोप है.

डीन के आरोपों पर क्या बोले मंत्री मुश्रीफ?

अजित पवार की पार्टी एनसीपी के हसन मुश्रीफ ने स्वीकार किया कि डॉक्टर तावड़े की नियुक्ति पार्टी के विधायक सुनील तिंगरे की ओर से दी गई चिट्ठी के आधार पर की गई थी. पीटीआई के अनुसार, उन्होंने कहा कि मेरे पास कोई दैवीय शक्ति नहीं है जिससे मैं अपने विभाग के प्रत्येक व्यक्ति और उनके कार्यों के बारे में सब कुछ जान सकूं.

मंत्री ने दावा किया कि विधायक ने तावड़े की नियुक्ति की सिफारिश की थी और उन्होंने इसे मंजूरी दे दी. हालांकि, मुश्रीफ ने कहा कि जब सिफारिश की गई थी, तो डीन को सरकार को डॉक्टर तावड़े के बारे में बताना चाहिए था.

डॉक्टर तावड़े बोले- मैं सिर्फ मंत्री के आदेश का पालन कर रहा था

दूसरी ओर, डॉक्टर विनायक काले ने स्वीकार किया कि उन्होंने तावड़े की नियुक्ति के लिए कार्यकारी आदेश जारी किया था. हालांकि, उन्होंने कहा कि वे केवल मंत्री के आदेश का पालन कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मैंने सिर्फ मंत्री के आदेश का पालन किया. उस समय नियुक्ति मंत्री के आदेश के अनुसार की गई थी.

आरोप है कि डॉक्टर तावड़े, एक अन्य डॉक्टर और अस्पताल के एक अन्य कर्मचारी ने पोर्शे चला रहे नाबालिग के ब्लड सैंपल के साथ छेड़छाड़ की. पीड़ित पक्ष ने हाल ही में एक स्थानीय अदालत को बताया कि दोनों डॉक्टरों ने लड़के को बचाने के अपने प्रयास के बदले रिश्वत ली थी.

पहले निबंध लिखवाया, बवाल के बाद नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा

हादसे के कुछ घंटों बाद, नाबालिग को इस शर्त पर जमानत पर रिहा कर दिया गया कि वो सड़क सुरक्षा पर एक निबंध लिखेगा. हालांकि, मामले की जानकारी और बवाल के बाद पुलिस ने नाबालिग को दोबारा हिरासत में लिया और बाल सुधार गृह भेज दिया.

पुलिस ने लड़के के पिता को बिना लाइसेंस के कार चलाने देने के आरोप में गिरफ़्तार किया है. साथ ही, नाबालिग के दादा को भी ड्राइवर पर दुर्घटना का दोष मढ़ने के लिए दबाव डालने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस का दावा है कि उनके पास दो बार में शराब पीने के बाद कार चलाने वाले नाबालिग का सीसीटीवी फुटेज है. पुलिस ने 17 साल के नाबालिग को शराब परोसने के आरोप में बार के मालिकों को भी गिरफ्तार किया है.

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