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मालवणी पुलिस के दो अधिकारियों पर सामाजिक कार्यकर्ता की कड़ी कार्रवाई, पद से हटाने की मांग

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मुंबई/संसद वाणी: मुंबई के मालवणी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जोरदार मुहिम छेड़ दी है। डॉ. अब्दुल कलाम संस्था के पदाधिकारियों द्वारा अवैध निर्माण के नाम पर पेड़ों की जड़ें काटने के मामले में मालवणी पुलिस स्टेशन की अधिकारी अमृता देशमुख और PSI प्रफुल मासाल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बागुल ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।

आपको बता दें कि सामना नगर, मालवणी गेट नंबर 8 के पास डॉ. अब्दुल कलाम संस्था के अध्यक्ष और सचिव ने एक दीवार निर्माण के चक्कर में कई पेड़ों की जड़ें काट दीं। इसकी जानकारी मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने तत्काल ब्रिक वर्क म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) में लिखित शिकायत दर्ज कराई। बीएमसी अधिकारियों ने मौके पर जांच की, जिसमें बागुल के सभी दावे सही साबित हुए। इसके बाद बीएमसी ने मालवणी पुलिस को नॉन-कॉग्निजेबल (एनसी) रिपोर्ट दर्ज करने के लिए औपचारिक पत्र जारी किया।

अब यहीं से मामला उलझ गया। मालवणी पुलिस की अधिकारी अमृता देशमुख और PSI प्रफुल मासाल ने इस साधारण एनसी रिपोर्ट को दर्ज करने में पूरे तीन माह की देरी की। आखिरकार, बागुल को सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन दाखिल करना पड़ा, तब जाकर एनसी दर्ज हुई। इस लापरवाही से नाराज बागुल ने वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी अभिषेक वशिष्ठ से शिकायत की। वशिष्ठ ने तुरंत मीडिया के लीगल सलाहकार श्री ओम प्रकाश मिश्रा को निर्देश दिए, जिन्होंने मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत भेज दी।

सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल और मीडिया चेयरमैन अभिषेक वशिष्ठ ने संयुक्त बयान जारी कर कहा, “यदि ये अधिकारी एक साधारण एनसी दर्ज करने में तीन माह लगा देते हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है? ऐसी लापरवाही प्रशासनिक विश्वास को कमजोर करती है। हम मांग करते हैं कि अमृता देशमुख और प्रफुल मासाल को तत्काल पद से हटा दिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सके।”

यह मामला पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसी शिकायतें आमतौर पर अनदेखी का शिकार हो जाती हैं, और बागुल जैसे कार्यकर्ताओं की पहल से ही बदलाव संभव है। मुंबई पुलिस ने अभी तक इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है।

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