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‘मस्जिदें स्थानांतरित किजिए, चीजें बदल जाएंगी’, काशी-मथुरा ईदगाह को लेकर भाजपा नेता का बयान 

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Kashi Mathura Mosques: असम के मुख्यमंत्री ने काशी और मथुरा की मस्जिद शिफ्ट करने को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान खुद इन्हें शिफ्ट करते हैं, तो चीजें बदल जाएंगी.

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि मुसलमानों को काशी और मथुरा की मस्जिदें स्थानांतरित करने दीजिए, चीजें बदल जाएंगी. भाजपा नेता और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर आप मथुरा में शाही ईदगाह बनाना जारी रखेंगे तो वहां आने वाले हिंदू स्वाभाविक रूप से नाराज होंगे.

सरमा ने कहा कि मुसलमानों को शाही ईदगाह को किसी दूसरी जगह पर स्थानांतरित कर देना चाहिए. जब ​​ऐसा होगा, तो अगली बार जब कोई हिंदू मथुरा आएगा, तो वह मुस्लिम समुदाय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए वापस आएगा. उन्होंने कहा कि स्थानांतरण ‘बलपूर्वक’ नहीं हो सकता बल्कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच परामर्श के माध्यम से ही हो सकता है.

हिमंत सरमा ने कहा कि अब (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी काशी कॉरिडोर बना रहे हैं, इसलिए हर कोई वहां जाता है. जो भी काशी जाता है, वह ज्ञानवापी मस्जिद देखता है. वे सवाल पूछते हैं और गुस्से में वापस आते हैं. अगर मस्जिद को जबरन नहीं बल्कि आपसी सलाह-मशविरे से दूसरी जगह ले जाया जाए, तो स्थिति अलग होगी. 

असम के बाहर 62 और असम में 117 रैलियों को किया संबोधित

भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल हिमंत बिस्वा सरमा ने अब तक पार्टी प्रत्याशियों के लिए असम के बाहर 62 भाजपा चुनावी रैलियों को संबोधित किया है. साथ ही असम में 117 रैलियों को संबोधित किया है. उन्होंने कहा कि हममें से कई लोगों के लिए इस्लामोफोबिया सच है, क्योंकि हमारे देश में मुसलमानों के कुछ वर्ग हैं जो बहुसंख्यक समुदाय से नफरत करते हैं. अगर आप असम में मेरे चुनावी भाषणों को देखें, तो मैंने मुस्लिम शब्द का बिल्कुल भी जिक्र नहीं किया है और मैंने मुस्लिम बहुल इलाकों में जमकर प्रचार किया है.

उन्होंने कहा कि मैंने मुस्लिम समुदाय के एक बड़े हिस्से को हिंदू विरोधी से बदलकर हिंदुओं के साथ सह-अस्तित्व में रहने वाले लोगों में बदल दिया है. असम में कई जगहों पर बदलाव हुआ है, इसलिए लव जिहाद की घटनाओं में कमी आई है, जमीन हड़पने की घटनाओं में कमी आई है.

उन्होंने कहा कि असम में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव अब तक के उच्चतम स्तर पर है. उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य में अपने अभियान के दौरान कोई मुस्लिम विरोधी टिप्पणी नहीं की, क्योंकि उन्होंने (मुसलमानों ने) परिसीमन प्रक्रिया को बहुत ईमानदारी से स्वीकार किया है.

सरमा बोले- मुसलमानों को UCC स्वीकार कर लेना चाहिए

असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार जब असम जैसा मॉडल राज्य के बाहर स्थापित हो जाए, तो मुसलमानों को समान नागरिक संहिता (UCC) स्वीकार कर लेनी चाहिए. मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि को स्वीकार कर लेना चाहिए, ज्ञानवापी मंदिर को स्वीकार कर लेना चाहिए, चीजें बदल जाएंगी. इससे हिंदुओं में इस्लामोफोबिया कम हो जाएगा. आज कश्मीर में मतदान का प्रतिशत बढ़ा है, लोगों ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को स्वीकार कर लिया है. 

हाल ही में हिमंत सरमा उस समय चर्चा में आ गए थे, जब उन्होंने झारखंड में एक चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि बांग्लादेशी घुसपैठिए असम की आबादी का 1.25 करोड़ हिस्सा हैं और राज्य के 126 विधायकों में से 40 उनके हैं.

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