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वाराणसी

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने खादी वस्त्रों को अपनाने का दिया संदेश

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खादी क्रय से ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के प्रति प्रतिबद्धता को बढ़ाता– कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा

वाराणसी/संसद वाणी : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने खादी के वस्त्रों के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वाराणसी स्थित खादी ग्रामोद्योग के विक्रय केंद्र पर जाकर खादी वस्त्रों का क्रय किया। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

खादी महात्मा गांधी के विचारों का प्रतीक है

खादी ग्रामोद्योग के केंद्र पर कुलपति प्रो.शर्मा ने खादी वस्त्रों की विविधता और उनकी गुणवत्ता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “खादी महात्मा गांधी के विचारों का प्रतीक है और यह हमें आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के सिद्धांतों की याद दिलाता है। खादी के वस्त्र न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करते हैं, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान देते हैं।”

कुलपति ने विश्वविद्यालय परिवार को खादी अपनाने का आव्हान किया

प्रो. शर्मा ने विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से भी खादी वस्त्रों को अपने जीवन में शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “खादी का उपयोग करना केवल एक वस्त्र धारण करना नहीं है, यह देश की आर्थिक प्रगति, ग्रामीण शिल्पकारों के रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है। खादी की सरलता और गुणवत्ता इसे विशेष बनाती है, और हमें इसे अपनी जीवन शैली का हिस्सा बनाना चाहिए।”

खादी को प्रोत्साहित करने हेतु विश्वविद्यालय में सेमिनार का आयोजन

इस अवसर पर कुलपति ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय आने वाले समय में खादी को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों और सेमिनारों का आयोजन करेगा, ताकि विद्यार्थियों में खादी के प्रति जागरूकता और स्वदेशी उत्पादों के प्रति सम्मान का भाव उत्पन्न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि “खादी न केवल एक वस्त्र है, बल्कि यह देश की समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनाए गए सिद्धांतों का जीवंत प्रतीक है। इसे अपनाना हमें न केवल अपनी जड़ों से जोड़ता है, बल्कि हमें आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति भी जागरूक करता है।”

कुलपति के इस कदम की सराहना

कुलपति के इस कदम की सराहना करते हुए स्थानीय नागरिकों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने इसे प्रेरणादायक बताया। उनका मानना है कि खादी वस्त्रों के प्रयोग से सामाजिक और आर्थिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव आएंगे। खादी ग्रामोद्योग के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की पहल से खादी की लोकप्रियता बढ़ेगी और इसे अपनाने वालों की संख्या में वृद्धि होगी।

खादी को मुख्यधारा में शामिल करने हेतु युवाओं में स्वदेशी के प्रति रुचि विकसित करना

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा का यह प्रयास खादी को मुख्यधारा में लाने और युवाओं में स्वदेशी वस्त्रों के प्रति रुचि जागृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वाराणसी के विभिन्न क्षेत्रों में खादी के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुए, यह पहल आने वाले समय में और व्यापक रूप से प्रभावी होगी।

इस अवसर पर खादी ग्रामोद्योग के अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने बताया कि खादी के उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन हो रहा है और देश के हस्तशिल्प उद्योग को नया जीवन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कुलपति का यह कदम खादी को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खादी के प्रति बढ़ती जागरूकता और इसे अपनाने की प्रवृत्ति ने देश भर में एक सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है।

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