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नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय समाचार
वर्ल्ड बुक फेयर के मंच पर भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती एक बार फिर देखने को मिली। World Book Fair में दोनों देशों के लेखकों, प्रकाशकों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि साहित्य और कला भारत–रूस की पारंपरिक मित्रता की मजबूत कड़ी बने हुए हैं।
साहित्य बना कूटनीति का सेतु
मेले में रूसी साहित्य के हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद, वहीं भारतीय लेखकों की कृतियों के रूसी संस्करणों को विशेष रूप से सराहा गया। साझा विमोचन समारोहों और संवाद सत्रों में इतिहास, दर्शन, समकालीन राजनीति और युवा साहित्य जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति
भारत और रूस के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों ने संयुक्त प्रकाशन परियोजनाओं, लेखक-आदान-प्रदान कार्यक्रमों और साहित्यिक उत्सवों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इससे दोनों देशों के पाठकों को एक-दूसरे की संस्कृति और विचारधाराओं को नज़दीक से समझने का अवसर मिलेगा।
वैश्विक मंच पर मित्रता का संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ल्ड बुक फेयर जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच केवल पुस्तकों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि “सॉफ्ट पावर” कूटनीति का प्रभावी माध्यम हैं। भारत–रूस की यह साहित्यिक साझेदारी बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों के रिश्तों को और सुदृढ़ करती है।