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मुंबई (कांदिवली): मुंबई के रियल एस्टेट जगत में बिल्डरों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। कांदिवली-मालाड वेस्ट के जनकल्याण नगर स्थित ‘सैफायर डोटम’ (Sapphire Dotom) प्रोजेक्ट के बिल्डर पर एक ग्राहक की मेहनत की कमाई अवैध रूप से रोकने का गंभीर आरोप लगा है। कानूनी नोटिस का जवाब न मिलने के बाद अब पीड़ित ग्राहक ने न्यायालय (Court) का रुख करने का फैसला किया है।
क्या है विवाद?
पीड़ित ग्राहक ने सैफायर डोटम प्रोजेक्ट में एक फ्लैट बुक करने के लिए 6 लाख रुपये की बुकिंग राशि जमा की थी। आरोप है कि बिल्डर और सेल्स मैनेजमेंट के खराब व्यवहार और वादों को पूरा न करने के कारण ग्राहक ने अपनी बुकिंग रद्द करने का आवेदन दिया।
बजाय पैसे वापस करने के, सेल्स मैनेजर ने ‘नो रिफंड पॉलिसी’ का हवाला देते हुए पूरी राशि जब्त कर ली। ग्राहक का आरोप है कि बिल्डर प्रबंधन इसे अपना विशेषाधिकार बताकर पैसे दबाए बैठा है।
लीगल नोटिस को किया अनसुना, अब शुरू होगी कानूनी जंग
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ने अपने अधिवक्ता (Advocate) के माध्यम से बिल्डर को कानूनी नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर रिफंड की मांग की थी। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बावजूद बिल्डर की ओर से कोई स्पष्टीकरण या जवाब नहीं आया है।
बिल्डर की इस चुप्पी और अड़ियल रवैये से तंग आकर अब ग्राहक ने कोर्ट जाने का मन बना लिया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि वे जल्द ही MahaRERA और उपभोक्ता न्यायालय (Consumer Court) में याचिका दायर करेंगे ताकि उन्हें न्याय मिल सके और उनकी राशि ब्याज सहित वापस मिले।
एक ही फ्लैट पर ‘डबल’ कमाई की कोशिश?
हैरानी की बात यह है कि जिस फ्लैट का रिफंड देने से बिल्डर इनकार कर रहा है, उसे अब दूसरे ग्राहकों को बेचने की तैयारी की जा रही है। जानकारों के अनुसार, यह रेरा के नियमों का सीधा उल्लंघन है। नियमानुसार, बुकिंग रद्द होने पर बिल्डर एक उचित प्रशासनिक शुल्क काटकर शेष राशि वापस करने के लिए बाध्य है।
“हमने शांति से अपना हक मांगा, लेकिन बिल्डर कानून को चुनौती दे रहे हैं। अब न्यायालय ही तय करेगा कि आम आदमी की मेहनत की कमाई इस तरह हड़पी जा सकती है या नहीं।” – पीड़ित ग्राहक का बयान।