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तारीख थी 16 मई 2025। सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ा फैसला सुनाया, जिसे ‘वनशक्ति जजमेंट’ के नाम से जाना जाता है।
- निर्णय: पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली या बिना पूर्व मंजूरी (Prior Clearance) के शुरू की गई परियोजनाओं को केंद्र सरकार किसी भी हाल में पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी (Post-facto Environmental Clearance) नहीं दे सकती।
- असर: यह फैसला उन हजारों औद्योगिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर बिजली बनकर गिरा, जो किसी न किसी कारण से बिना मंजूरी के काम कर रही थीं। इसका सीधा मतलब था कि ऐसी परियोजनाओं को बंद करना पड़ता या उन्हें ध्वस्त करने तक की नौबत आ सकती थी।
18 नवंबर 2025: कोर्ट का ऐतिहासिक ‘यू-टर्न’
बीते मंगलवार, 18 नवंबर 2025 को, सुप्रीम कोर्ट ने 2:1 के बहुमत से अपने ही 6 महीने पुराने फैसले को वापस (Overruled) ले लिया!
यह फैसला क्यों पलटा गया? इसके पीछे एक बहुत बड़ी चिंता थी:
“अगर सभी अनधिकृत परियोजनाओं को ध्वस्त कर दिया गया, तो इससे ₹20,000 करोड़ से अधिक की सार्वजनिक परियोजनाएं बर्बाद हो जाएंगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जनहित में परियोजनाओं को बचाना ज़रूरी है।”
अब क्या होगा? जुर्माना भरो, आगे बढ़ो!
इस नए निर्णय ने केंद्र सरकार और इंडस्ट्री को बड़ी राहत दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि अब हर कोई नियमों का उल्लंघन कर सकता है। कोर्ट ने एक स्पष्ट रास्ता दिखाया है:
- राहत: अब केंद्र सरकार कुछ शर्तों के साथ ऐसी परियोजनाओं को पूर्वव्यापी मंजूरी दे सकती है।
- सजा: प्रोजेक्ट्स को पर्यावरणीय क्षति के लिए भारी जुर्माना (Heavy Penalty) भरना होगा। यह जुर्माना पर्यावरण बहाली और क्षतिपूर्ति के लिए इस्तेमाल होगा।
यह फैसला दिखाता है कि कोर्ट ने पर्यावरण की सुरक्षा और देश के आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार जुर्माने के मानदंडों को कितना सख्त रखती है ताकि नियमों का उल्लंघन करने की प्रवृत्ति पर रोक लगे।