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मुंबई, 25 जुलाई 2025: मालवणी, मुंबई के सामना नगर, गेट नंबर 8 में पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद मालवणी पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल द्वारा की गई शिकायत के बावजूद, मालवणी पुलिस की ओर से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में पुलिस अधिकारी अमृता देशमुख और पीएसआई प्रफुल मासाळ की भूमिका विशेष रूप से संदेह के घेरे में है।
सामना नगर, गेट नंबर 8 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सहकारी गृहनिर्माण संस्था फेडरेशन मर्या के अध्यक्ष बालासाहेब भगत और सचिव अखिल शेख द्वारा दीवार निर्माण के लिए कई पेड़ों की जड़ों को काटने का आरोप है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि पेड़ों की जड़ें निर्माण में बाधा बन रही थीं। सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने इस पर्यावरणीय अपराध को उजागर करते हुए बीएमसी में शिकायत दर्ज की। बीएमसी की जांच में पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि हुई, और 11 जनवरी 2025 को मालवणी पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी गई, और अधिकारी अमृता देशमुख द्वारा 23 मार्च 2025 को NC फाइल की गई।
बीएमसी की शिकायत के बावजूद, मालवणी पुलिस ने कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की। सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल का कहना है कि अधिकारी अमृता देशमुख और पीएसआई प्रफुल मासाळ ने महीनों तक मामले को टाला। बागुल को मजबूरन RTI दाखिल करनी पड़ी, जिसके बाद अमृता देशमुख ने तीन महीने की देरी से एक गैर-संज्ञेय (NC) शिकायत दर्ज की। इस देरी पर सवाल उठाने पर देशमुख ने जवाबदेही से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह मामला पीएसआई मासाळ के अधीन है।
छह महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई। जब बागुल और मीडिया ने इस पर सवाल उठाए, तो अमृता देशमुख ने बागुल और मीडिया के नंबर ब्लॉक कर दिए, जबकि पीएसआई प्रफुल मासाळ ने कॉल उठाना बंद कर दिया।
- वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी
मामले की गंभीरता के बावजूद, मालवणी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय अमृता देशमुख की तारीफ में जुटे हैं। सवाल उठता है कि क्या तीन महीने में NC शिकायत दर्ज करना कोई उपलब्धि है? यह लापरवाही मालवणी की जनता में असुरक्षा और आक्रोश पैदा कर रही है।
@SVNEWS_MAH ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @mumbaipolice को टैग करके उठाया, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। यह स्थिति मुंबई पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।
सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल के सवाल
- क्या अमृता देशमुख और प्रफुल मासाळ की निष्क्रियता पर्यावरण अपराधों को बढ़ावा दे रही है?
- क्या इन अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
- क्या मालवणी की जनता ऐसी पुलिस व्यवस्था के साथ सुरक्षित है?
- वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
- पर्यावरण और कानून का मखौल
पेड़ों की अवैध कटाई न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि यह एक गंभीर कानूनी अपराध भी है। बीएमसी की शिकायत के बावजूद, मालवणी पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम न उठाना न केवल उनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल और स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि इस मामले में तत्काल FIR दर्ज की जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत और सचिव अखिल शेख के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में जवाब देना होगा कि आखिर क्यों अमृता देशमुख और पीएसआई प्रफुल मासाळ को संरक्षण दिया जा रहा है? क्या पर्यावरण अपराधों को नजरअंदाज करना पुलिस की प्राथमिकता है? क्या मालवणी की जनता को न्याय मिलेगा?
यह मामला न केवल मालवणी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही और पारदर्शिता को कटघरे में खड़ा करता है। जनता अब इंतजार कर रही है कि इस मामले में कब और कैसे न्याय होगा।
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