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जीवन का चरम लक्ष्य आंनद प्राप्ति – सुश्री धामेश्वरी देवी जी

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वाराणसी/संसद वाणी : श्री हनुमान प्रसाद स्मृति सेवा ट्स्ट, दुर्गा मंदिर के सामने, दुर्गाकुंड, उ.प्र. में चल रही दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला के दूसरे दिन शनिवार को जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका सुश्री धामेश्वरी देवी जी ने वेद और शास्त्रों के प्रमाण सहित बताया कि विश्व का प्रत्येक जीव एकमात्र आनंद ही चाहता है। वह आनंद कहाँ है? कैसे मिलेगा? इसी के लिए अनवरत् प्रयासरत् है। क्योंकि जीव ईश्वर का अंश है। रामायण में भी कहा गया है-
‘‘ईश्वर अंश जीव अविनाशी, चेतन अमल सहज सुख राशि।।‘‘


और वेदों के अनुसार ‘‘रसो वै सः‘‘ अर्थात ईश्वर ही आनंद है वही रस है। इसीलिए प्रत्येक जीव ईश्वर का सनातन अंश होने के कारण अनादिकाल से आनंद की खोज में लगा हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वेद कहते हैं कि विश्व का प्रत्येक जीव आस्तिक है। इस उक्ति को एक उदाहरण के माध्यम से समझाया गया जैसे कोई नवजात शिशु है, वह जन्म लेते ही पहले रोता है क्योंकि जन्म के समय जो कष्ट होता है उसे वह नहीं चाहता इसलिए रोकर उस दुख को दूर करने का प्रयास करता है। ऐसे ही किसी विद्यार्थी से पूछा जाए कि तुम पढ़ाई क्यों कर रहे हो वह कहेगा कि परीक्षा में पास हो जाए हमारी अच्छी जॉब लग जाए। फिर पूछा जाए इससे तुम्हें क्या मिलेगा? वह कहेगा सुख मिलेगा खुशी मिलेगी तो यह सब सुख, खुशी, हैप्पीनेस, शांति आदि ईश्वर के ही पर्यायवाची शब्द है। अतः यह निर्विवाद सिद्ध होता है कि हम सभी जीव केवल ईश्वर को ही चाहते हैं क्योंकि हम प्रतिक्षण सुख पाने की होड़ में लगे हुए हैं। परंतु इसके विपरीत हमारे वेद यह भी बताते हैं, कि विश्व का प्रत्येक जीव नास्तिक है यह महान आश्चर्य है और कैसे हैं? यह आगे प्रवचन में बताया जाएगा। प्रवचन के अंत में श्री राधा कृष्ण भगवान की भव्य आरती हुई जिसमें समस्त भक्त गणों ने आध्यात्मिक लाभ लिया।

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