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सिक्किम में क्यों हार गई BJP, पढ़ें पूरी रिपोर्ट 

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Sikkim Election Results Analysis: सिक्किम में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे रविवार को घोषित कर दिए गए हैं जिसमें सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) ने 32 में से 31 सीटों पर जीत हासिल कर एक बार फिर से सरकार बना ली है. वहीं भारतीय जनता पार्टी के हिस्से में एक भी सीट नहीं आई. आइये इन नतीजों के मायने समझें-

सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने सिक्किम विधानसभा चुनाव 2024 में शानदार जीत हासिल की है. रविवार को घोषित चुनाव आयोग के नतीजों के अनुसार, पार्टी ने 32 में से 31 सीटें जीती हैं. हिमालयी राज्य में एसकेएम की वापसी ने साफ कर दिया कि चुनावी नजरिए से उसका कितना डॉमिनेंट प्रदर्शन रहा है.

वहीं इसके उलट खड़ी विपक्षी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को करारी हार का सामना करना पड़ा, वह विधानसभा में केवल एक सीट जीतने में सफल रही. सिक्किम विधानसभा के लिए चुनाव 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के साथ-साथ आयोजित किए गए थे, जिसके नतीजे अब एसकेएम के साथ साफ जनादेश दिखाते हैं.

पीएम मोदी ने दी जीत की बधाई

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एसकेएम प्रमुख प्रेम सिंह तमांग को उनकी पार्टी की जीत के लिए बधाई दी और कहा कि वह सिक्किम की प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं.

एसकेएम प्रमुख और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) को बधाई देते हुए मोदी ने कहा, ‘मैं आने वाले समय में सिक्किम की प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं.’

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘मैं विधानसभा चुनाव में @BJP4Sikkim को वोट देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करता हूं. मैं हमारे कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना करता हूं. हमारी पार्टी सिक्किम के विकास और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हमेशा सबसे आगे रहेगी.” 

भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ा 

सिक्किम में भाजपा ने 31 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई, जहां मौजूदा सदन में उसके 12 सदस्य थे. हिमालयी राज्य में भाजपा को केवल 5.18 प्रतिशत वोट ही मिल पाए. एसकेएम को 58.38 प्रतिशत वोट मिले, जबकि सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को 27.37 प्रतिशत वोट मिले.

सिक्किम भाजपा अध्यक्ष दिली राम थापा अपर बुर्तुक विधानसभा क्षेत्र में एसकेएम उम्मीदवार कला राय से हार गए. मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री थापा राय से 2,968 मतों से हार गए. राय को 6,723 वोट मिले, जबकि थापा को 3,755 वोट मिले. सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के डीबी थापा को 1,623 वोट मिले, जबकि बीके तमांग (CAP-A) को 581 वोट मिले. 

सीट शेयरिंग पर नहीं बनी बात तो छोड़ा एक-दूसरे का साथ

उल्लेखनीय है कि बीजेपी और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व वाले सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) के बीच विधानसभा चुनावों में सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं बन सकी और यही वजह रही कि दोनों ने चुनावों में अकेले जाने का फैसला किया.  सीटों के लिए होड़ करने वाली अन्य पार्टियों में कांग्रेस और सिटीजन एक्शन पार्टी-सिक्किम (CAP-S) शामिल थे. सुबह 6 बजे से ही कड़े सुरक्षा उपायों के साथ छह जिलों में छह स्थानों पर मतगणना की प्रक्रिया शुरू हो गई. 

पारदर्शी रहे चुनाव के नतीजे

अधिकारियों ने कहा कि विभिन्न जिलों में मतगणना की व्यवस्था की गई है: गंगटोक में नौ सीटें, नामची में सात, पाकयोंग में पाँच, सोरेंग और ग्यालशिंग में चार-चार और मंगन में तीन सीटें. भारत के चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष मतगणना प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों को तैनात किया था, और उनकी देखरेख में व्यापक सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं. 19 अप्रैल को पहले चरण के दौरान 32 विधानसभा क्षेत्रों और एक लोकसभा सीट पर 4.64 लाख पात्र मतदाताओं में से लगभग 80 प्रतिशत ने अपने मत डाले.

एकमात्र लोकसभा सीट के लिए मतों की गिनती देश के बाकी हिस्सों के साथ 4 जून को की जाएगी. इसके अतिरिक्त, सीईओ कार्यालय ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों ने पोस्टल मतपत्रों के माध्यम से अतिरिक्त चार प्रतिशत वोट डाले.

रोमांचक रही इन नेताओं की जंग

तमांग, चामलिंग, भूटिया और कई अन्य प्रमुख हस्तियों के बीच जीत के लिए होड़ के कारण मुकाबला काफी रोमांचक है. मैदान में मौजूद 146 उम्मीदवारों में से प्रमुख दावेदारों में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, उनकी पत्नी कृष्णा कुमारी राय, पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग और पूर्व भारतीय फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया शामिल हैं. एसकेएम और एसडीएफ ने सभी 32 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे, उसके बाद भाजपा (31), सीएपी-सिक्किम (30) और कांग्रेस (12) ने अपने उम्मीदवार उतारे. 

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने शानदार जीत हासिल की

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने हाल ही में हुए चुनावों में शानदार जीत के बाद पार्टी समर्थकों और सिक्किम के मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया. गंगटोक के पलजोर स्टेडियम में एक सभा को संबोधित करते हुए तमांग ने पिछले पांच वर्षों में सरकार पर लोगों के भरोसे और स्नेह को सफलता का श्रेय दिया. 

उन्होंने कहा, ‘यह लोगों के प्यार और भरोसे की वजह से है, जिसे हम पिछले पांच वर्षों में सरकार में बनाए रखने में कामयाब रहे हैं. इसके अलावा, पार्टी कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की है.’ तमांग, जिन्होंने रेनॉक और सोरेंग-चाकुंग दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था, दोनों सीटों पर विजयी हुए. उन्होंने सिक्किम के लोगों को आश्वासन दिया कि सरकार अगले पांच वर्षों में उनकी सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित रहेगी.

पत्नी कृष्णा कुमारी को भी मिली जीत

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की पत्नी कृष्णा कुमारी राय रविवार को नामची-सिंघीथांग विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में विजयी हुईं, जैसा कि अधिकारियों ने पुष्टि की है. सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) का प्रतिनिधित्व करते हुए, कृष्णा राय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के बिमल राय पर 5,302 मतों के अंतर से निर्णायक जीत हासिल की. अंतिम टैली से पता चला कि एसकेएम उम्मीदवार को 7,605 वोट मिले, जबकि एसडीएफ के उम्मीदवार को 2,605 वोट मिले. मैदान में अन्य उम्मीदवार, सीएपी-एस के महेश राय और भाजपा की अरुणा मंगर को क्रमशः 136 और 233 वोट मिले.

हार गए पूर्व सीएम पवन कुमार चामलिंग

सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के नेता पवन कुमार चामलिंग को रविवार को आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार पोकलोक कामरंग और नामचेयबुंग दोनों विधानसभा क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा.

पोकलोक कामरंग में, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) के भोज राज राय 8,037 वोटों के साथ विजयी हुए, जबकि चामलिंग को 4,974 वोट मिले. इसी तरह, नामचेयबुंग विधानसभा क्षेत्र में, चामलिंग को एसकेएम के राजू बसनेत ने हराया, जिन्हें चामलिंग के 4,939 वोटों की तुलना में 7,195 वोट मिले, जिससे 2,256 वोटों का अंतर हुआ.

कैसा रहा था 2019 का चुनाव

2019 के चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिली, जिसमें एसकेएम ने एसडीएफ की 15 सीटों के मुकाबले 17 सीटें जीतीं, जिससे एसडीएफ का 25 साल का शासन खत्म हो गया. दिलचस्प बात यह है कि एसडीएफ को एसकेएम से ज्यादा वोट मिलने के बावजूद सत्ता से बाहर होना पड़ा.

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